मैं धीरे-धीरे फिसलता गया उसकी मीठी मीठी बातों में उसका इरादा नेक नहीं था उसकी नजर मेरी नोटों से भरी जेब पर था जब तक मुझको होश हुआ सब कुछ लुट चुकी थी वह
इश्क एक दरिया है अगर तुम पार ना हो सके तो डूब जाओगे खुद को कोसने लगोगे वहां आंसू बहाओ गे फिर जहां से चले थे फिर उसी जगह लौट जाओगे