सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मैं धीरे-धीरे फिसलता गया

मैं धीरे-धीरे फिसलता गया उसकी मीठी मीठी बातों में उसका इरादा नेक नहीं था उसकी नजर मेरी नोटों से भरी जेब पर था जब तक मुझको होश हुआ सब कुछ लुट चुकी थी वह

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

इश्क एक दरिया है

इश्क एक दरिया है अगर तुम पार ना हो सके तो डूब जाओगे खुद को कोसने लगोगे वहां आंसू बहाओ गे फिर जहां से चले थे फिर उसी जगह लौट जाओगे

इशारों से काम चलेगा नहीं

इशारों से काम चलेगा नहीं अब इजहार तुमको करना ही होगा नहीं तो चाहत की गलियां दूर हो जाएंगी उनका प्यार पाना है तो संभलना ही होगा

इश्क की गलियों में हम भिखारी हैं

इश्क की गलियों में हम भिखारी हैं जो भी मिल जाए गुजारा हो जाता है दूसरों की शानों शौकत की तरह चाहत है मगर क्या करें हर किसी का ख्वाब पूरा नहीं होता